Browsing: डाॅ गजादान चारण “शक्तिसुत

साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली रै अनुवाद पुरस्कार 2019 सूं आदरीजण वाळी काव्यकृति ‘चारु वसंता’ मूळ रूप सूं कन्नड़ भासा रो…

ना मिलती है अनायास ही,ना मिलती उपहारों मेंना पैसे के बल आजादी,मिलती कहीं बाजारों में लाखों का सिंदूर पुँछा है,लाखों…

कर रहा हूँ यत्न कितने सुर सजाने के लिए पीड़ पाले कंठ से मृदु गीत गाने के लिए साँस की…