Browsing: राजेन्द्र कवियां बिराई

सुप्रभातम् शक्ति सुतन, सुंडाला शिर वदन। विघ्न नाशम् विनायकम्, जो शोभा शिव सदन।। सुप्रभातम् माँ शारदे, कंठो करत निवास। शब्द…