March 31, 2023

प्राक्कथन-इतिहास एवं काव्य का मणिकांचन सुमेल: बीसहथी मां बिरवड़ी

राजस्थान जितना बहुरंगी है उतना ही विविधवर्णी यहां का काव्य है। जब हम यहां के पारम्परिक काव्य का अनुशीलन करते हैं तो शक्ति भक्ति से अनुप्राणित काव्यधारा हमारे सामने आती है। जैसा कि अन्य जगहों पर रामभक्ति काव्यधारा व कृष्णभक्ति काव्यधारा की सरस सलिला प्रवाहित होती हुई हम देखते हैं …

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