March 25, 2023

श्री सूरज भगवान रो छंद- रचना, राजेंद्र दान(कवि राजन) झणकली

श्री सूरज भगवान रो छंद
रचना- राजेंद्र दान (कवि राजन)झणकली।
काछब सुत किरपा करो आपो दया अपार।
वंदों प्राणी जन वनसति आप बिन घोर अंधार।।,,,,,1
हेवर सत रथ हांकता पहुमि उजास प्रमाण।
रेण दिवस हथ राखता दिनकर हे दुनियांण।।,,,2
दिनकर तुम दया करो अवनी मैहर अपार।
पवन दुषित पावन करो हर कर रोग हजार।।,,3
छंद रेणकी
ब्रह्मा सुत मरीच मरीच सुत कच्छप सुत कच्छप रविराज सरे
अंश आर्यमान भाग दक पूषण धात वरुण मित वमन वरे
सूरज सवित संग द्वादश जनमत संतान कच्छप अदितीय हरे।
चढ़कर सपतास हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे जी आ रविराज आलोक करे।,,,,,1
संज्ञाजी नाम सुता विशकरमा छाया बणकर साथ रही
पुत दोय हुआ निज कोख भयंकर जमराज छनिछर नाम दही
सुत अशवन वेवश मनु जमना तप  जांणत सारा जगत परे
चढ़कर सपताश हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे जी आ रविराज आलोक करे,,,,,2
जीवण सुख दुख सब साथ महाबल देय छनि महाराज दुआ
राखण मृत जीव निज हाथ महारथ जमलोके यमराज हुआ
जन पाप धरम तुम तोल पुनारथ रवि सुत पूजत जगत हरे
चढ़कर सपताश हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे ,,,,,3
पंक्ति जगति भ्रात त्रिसप गायत्री सत उस्निक अनुतप हय लिया
सपत अशव संग सपत भरण रंग सपत दिवस निज नाम दिया
रोशन उतपन कर निज तन रंग भर पिनाला बेनिआह परे
चढ़कर सपताश हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे,,,,,,,4
सन्मुख बैठत रथ अरुण देव जद इक पहिया रथ हांक रहे
इक इक तिलि हे इक माह बरोबर द्वादश तीली साल  कहे
नभ पर चाल अथक निंरन्तर चालत दिवस रेण ऋतु होय धरे
चढ़कर सपताश हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे,,,,,5
जब लग तव दरश होत नह धर पर इधर उधर तम गहन परे
इल पर घण उमस रहत जन व्याकुळ चित मो नाही चेन सरे
विध विध वाइरस व्याप्त पवन मो कोटिक व्याधि दूर करे
चढ़कर सपताश हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे,,,,,6
जप तप अति कर मूनी जोगेशर आर्ध्य देय नित आप तणी
नभ पर कर चकर समस्त ग्रह नखतर घुमत चंहुदिश तोय धणी
तो बिन जनजीवन होत असंभव कवि राजन नमस्कार करे
चढ़कर सपताश हरण जग तामस सुत काछब नित शाय करे जी आ रविराज आलोक करे,,,,,7
छपय
समरो सुत काछब सदा प्रातः उगतों पेल
समरो सुत काछब सदा भगवन रहसी बेल।
समरो सुत काछब सदा तृपत रहो तरोताज।
समरो सुत काछब सदा करे सफल हर काज।।
कर जोड़ कवि राजन कहे सुत कच्छप समरो सदा।
रोग दोग नाही रहे कष्ट क्रोध नाही कदा।
रचना, राजेंद्र दान(कवि राजन) झणकली
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